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Nagpur (Maharashtra)
सहायता

हमारी कार्यप्रणाली का आधार

रुद्र सुर्या मायक्रोन लोर्न असोसिएशन का मानना है कि सच्चा विकास तभी संभव है, जब समाज का हर वर्ग — खासकर अपंग, अनाथ और निराधार लोग — मुख्यधारा से जुड़े। हमारा उद्देश्य सिर्फ राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि स्थायी समाधान देना है। हम महाराष्ट्र भर में ऐसे लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ और छोटे गृह उद्योग लगाने में सहकार्य करते हैं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। हर छोटा कदम एक बड़ी मुस्कान की वजह बनता है।

शिक्षा

शिक्षा — हर विशेष जरूरतमंद तक

अपंग और अनाथ बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा, किताबें और विशेष शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना।

  • ब्रेल पुस्तकें, श्रवण यंत्र एवं सहायक उपकरण
  • अनाथ बच्चों के लिए प्री-स्कूल से 12वीं तक सपोर्ट
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण (कंप्यूटर, हस्तकला)
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
  • स्कॉलरशिप और यूनिफॉर्म सहायता

प्रभाव: महाराष्ट्र के 30+ जिलों में 1500+ विशेष बच्चों को शिक्षा से जोड़ा

स्वास्थ्य

स्वास्थ्य सेवाएँ

निराधार, बुजुर्ग और अपंग लोगों तक निशुल्क चिकित्सा सुविधाएँ पहुँचाना।

  • मोबाइल मेडिकल वैन (ग्रामीण महाराष्ट्र)
  • शिविरों में नेत्र, दंत एवं कृत्रिम अंग सहायता
  • मानसिक स्वास्थ्य परामर्श
  • नियमित स्वास्थ्य जांच और दवा वितरण
  • अपंगों के लिए पुनर्वास केंद्र

प्रभाव: 1,00,000+ लोगों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा

उद्योग

गृह उद्योग सहकार्य

असहाय लोगों को छोटे-छोटे उद्योग (अगरबत्ती, मसाला, बैग, सिलाई) स्थापित करने में मदद।

  • प्रशिक्षण एवं कच्चा माल उपलब्ध कराना
  • बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं से जोड़ना
  • तैयार उत्पादों की बिक्री हेतु मार्केटिंग सहायता
  • महिला समूहों के लिए विशेष होम बेस्ड यूनिट्स
  • अपंगों के लिए अनुकूल कार्यस्थल निर्माण

प्रभाव: 400+ स्वयं सहायता समूह सक्रिय, 5000+ परिवार आत्मनिर्भर

रोजगार

उद्योगधंदों से जोड़ना

अनाथ/निराधार युवाओं और अपंगों को स्थानीय उद्योगों/फैक्ट्रियों में रोजगार दिलाना।

  • कौशल विकास केंद्र (महाराष्ट्र के मंडल स्तर पर)
  • कंपनियों के साथ MoU कर प्लेसमेंट
  • MSME रजिस्ट्रेशन में मदद
  • सिलाई, पैकेजिंग, हैंडीक्राफ्ट प्रशिक्षण
  • डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन कमाई के अवसर

प्रभाव: 2000+ लोगों को स्थायी रोजगार और स्वरोजगार

आश्रय

अनाथ एवं निराश्रय आश्रय

बिना सहारे के बच्चों और बुजुर्गों के लिए संरक्षण गृह एवं पुनर्वास।

  • 24x7 देखरेख, भोजन, वस्त्र
  • कानूनी सहायता और गोद लेने की प्रक्रिया में मदद
  • बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम सहयोग
  • आश्रित बच्चों के लिए व्यावसायिक शिक्षा
  • परिवार पुनर्मिलन कार्यक्रम

प्रभाव: 12 शेल्टर होम्स को सपोर्ट, 800+ बच्चों को सुरक्षित आश्रय

अपंग अनुकूल

अपंग अनुकूल संसाधन

सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों और उद्योगों को दिव्यांगों के अनुकूल बनाने की पैरवी और कार्य।

  • रैंप, संकेत भाषा प्रशिक्षण, सहायक उपकरण
  • विशेष सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर अनुकूलन
  • सरकारी योजनाओं (UDID, पेंशन) से जोड़ना
  • जागरूकता अभियान — 'सबका साथ, सबका विकास'
  • निःशुल्क ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग

प्रभाव: 100+ संस्थानों/सरकारी कार्यालयों को अपंगानुकूल बनाया

प्रक्रिया

हमारी कार्यप्रणाली — पूरे महाराष्ट्र में

जमीनी स्तर पर पहचान, फिर स्थायी समाधान तक का सफर

1

जरूरतमंदों की पहचान

गाँव-गाँव, झुग्गी-बस्ती, सड़क किनारे रहने वालों का सर्वेक्षण

2

व्यक्तिगत सहायता योजना

शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग — तीनों स्तरों पर जरूरत के हिसाब से रोडमैप

3

स्थानीय संसाधनों से जोड़ना

बैंक, सरकारी योजनाएँ, उद्योग समूह, ग्राम पंचायत के सहयोग से क्रियान्वयन

4

निरंतर मॉनिटरिंग

तीन माह, छह माह, एक साल पर प्रभाव मूल्यांकन और सुधार

हमारे मूल मंत्र

अपनत्व

हर निराधार व्यक्ति हमारा अपना

समावेशिता

अपंगों को हर क्षेत्र में बराबर का हिस्सा

स्वावलंबन

रोजगार और उद्योग से आत्मनिर्भरता

शिक्षा से सशक्तिकरण

बिना किसी भेदभाव के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा